राजधानी देहरादून से एक बहुत बड़े शैक्षणिक फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जिसने मेडिकल शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस (MBBS) की सीटें बेचने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद हड़कंप मच गया है। इस गिरोह का नेटवर्क मेरठ से लेकर देहरादून और राज्य के अन्य हिस्सों तक फैला हुआ था, जहाँ यह गिरोह फर्जी निवास और आरक्षण प्रमाणपत्रों के जरिए प्रति सीट ४५ लाख रुपये तक वसूल कर दाखिले करवा रहा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय विशेष जांच टीम (SIT) से जांच कराने के आदेश दे दिए हैं। जांच के दौरान शुरुआती तौर पर लापरवाही और संदिग्ध भूमिका पाए जाने पर देहरादून के दो राजस्व अधिकारियों (लेखपालों) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस निलंबन कार्रवाई के बाद लेखपाल संघ में भी असंतोष देखा जा रहा है और उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है।
पुलिस और एसआईटी की संयुक्त कार्रवाई में इस गिरोह के कई मुख्य आरोपियों को चिन्हित किया जा चुका है और छापेमारी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि यह जांच सिर्फ एमबीबीएस सीटों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अन्य आरक्षित श्रेणियों और कोटे के तहत हुए पुराने नामांकनों की भी समीक्षा की जाएगी। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी योग्य और मेधावी छात्र का हक मारकर पैसे के दम पर फर्जी अभ्यर्थियों को दाखिला न मिले। देहरादून के इस मामले के सामने आने के बाद राज्य के अन्य मेडिकल संस्थानों में भी सत्यापन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

