उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मानसून के पुनः सक्रिय होते ही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है, जिसके चलते शहर के कई निचले इलाकों में गंभीर जलभराव और तबाही के दृश्य सामने आए हैं। देहरादून के चानचक क्षेत्र में तेज बहाव के कारण तीन मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए, जबकि चंद्रबनी और आसपास की आवासीय कॉलोनियों में बरसाती नालों का पानी घुसने से नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिले के ग्रामीण अंचलों में भारी भूस्खलन और मलबे के कारण चार प्रमुख संपर्क मार्ग यातायात के लिए पूरी तरह बंद हो गए हैं, जिससे दर्जनों गांवों का संपर्क कट गया है और जिला प्रशासन की टीमें जेसीबी मशीनों के जरिए सड़कों को खोलने के कार्य में जुटी हुई हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और चंपावत सहित चार प्रमुख जिलों के लिए भारी से अत्यधिक भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों और तीर्थयात्रियों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। यद्यपि तमसा, रिस्पना और बिंदाल जैसी स्थानीय नदियों का जलस्तर फिलहाल चेतावनी के स्तर से नीचे बना हुआ है, लेकिन जलभराव की संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को यह कड़े निर्देश दिए हैं कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर खाद्यान्न व चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही, दून घाटी में पुराने हो चुके ड्रेनेज सिस्टम और अनियोजित शहरी निर्माण के कारण बार-बार पैदा होने वाले जलभराव की समस्या पर नगर निगम और आपदा प्रबंधन विभाग के समन्वय से दीर्घकालिक ठोस नीति बनाने पर भी प्रशासनिक स्तर पर मंथन शुरू कर दिया गया है।
देहरादून में मानसून की भारी बारिश से तबाही और जलभराव के बीच मौसम विभाग ने जारी किया चार जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट

