उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नगर निगम और ज़िला प्रशासन ने रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अपनी रणनीति पूरी तरह से स्पष्ट कर दी है। रिस्पना नदी के प्रवाह क्षेत्र और कैचमेंट एरिया में लंबे समय से बने अवैध निर्माणों के कारण हर साल मॉनसून के दौरान भीषण जलभराव और तबाही की स्थिति पैदा होती है। इस स्थिति से निपटने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा किए गए विस्तृत भूमि सीमांकन के बाद चिन्हित किए गए 324 मकानों को ध्वस्त करने का निर्णय लिया गया है। नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय के अनुसार, इस विशाल ध्वस्तीकरण अभियान की शुरुआत मॉनसून सत्र समाप्त होते ही की जाएगी। प्रशासन ने क्षेत्र में रहने वाले सभी प्रभावित परिवारों को अंतिम नोटिस जारी कर दिया है, ताकि वे बिना किसी अप्रिय स्थिति के समय रहते अपने आवास खाली कर दें। बेघर होने वाले पात्र परिवारों के पुनर्वास के लिए मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) के किफायती आवासीय फ्लैटों में शिफ्ट होने का अंतिम विकल्प प्रदान किया गया है। कई परिवारों को पुनर्वास योजना के तहत पहले ही फ्लैट आवंटित किए जा चुके हैं, परंतु उनके द्वारा स्थान खाली न किए जाने पर अब अंतिम चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मानवीय पहलुओं का ध्यान रखते हुए पुनर्वास की उचित प्रक्रिया पूरी करने के तुरंत बाद ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके साथ ही, नदी क्षेत्र में बने सरकारी ढांचों पर भी कड़ी कार्रवाई जारी है, जिसके अंतर्गत एक सरकारी स्कूल, एक पंचायत भवन और एक ट्यूबवेल को पहले ही हटाया जा चुका है। यदि नए प्रशासनिक सर्वे में बाढ़ क्षेत्र के भीतर और भी ढांचे पाए जाते हैं, तो उन्हें भी प्राथमिकता के आधार पर पुनर्वासित कर हटाया जाएगा। मॉनसून के दौरान लगातार हो रही तेज बारिश के कारण शहर के डीएल रोड, राजपुर रोड और ओल्ड सर्वे रोड जैसे इलाकों में भारी जलभराव देखा जा रहा है। इस बीच भूमिगत केबल बिछाने के लिए खोदी गई सड़कों ने राहगीरों और वाहन चालकों की मुश्किलें और अधिक बढ़ा दी हैं। आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम को 24 घंटे हाई अलर्ट पर रखा गया है और क्विक रिस्पॉन्स टीमों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय निवासियों से भी नदी-नालों के पास जाने से बचने की अपील की गई है ताकि किसी अनहोनी को रोका जा सके। सरकार रिस्पना और बिंदाल नदियों को पुनर्जीवित करने और उनके प्राकृतिक स्वरूप को लौटाने के लिए इस अभियान को अत्यंत महत्वपूर्ण मान रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का भी मानना है कि बाढ़ क्षेत्र को खाली कराने से शहर की जल निकासी व्यवस्था में व्यापक सुधार आएगा। शहरी विकास विभाग इस पूरे अभियान पर सीधी नजर बनाए हुए है ताकि विस्थापितों को मूलभूत सुविधाएं भी निर्बाध रूप से मिल सकें। आने वाले महीनों में यह कार्रवाई देहरादून के शहरी ढांचे और नदी संरक्षण नीति का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगी।
देहरादून में मॉनसून के बाद रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र से हटेगा अतिक्रमण, 324 अवैध मकानों पर अंतिम चेतावनी नोटिस जारी

