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भारी मानसून बारिश के बाद देहरादून में नवनिर्मित पुल की पहुंच सड़क धंसी

ITV News की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में भारी मानसूनी बारिश के कारण नंदा की चौकी स्थित नवनिर्मित पुल की पहुंच सड़क अचानक धंस गई, जिससे पूरे क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह पुल हाल ही में 12 जुलाई को आम जनता के यातायात के लिए फिर से खोला गया था, जब पिछली बाढ़ ने वहां बने अस्थायी मार्ग को पूरी तरह नष्ट कर दिया था, लेकिन कुछ ही हफ्तों के भीतर नदी के तेज बहाव ने नवनिर्मित डामर सड़क के निचले हिस्से की मिट्टी को काट दिया। घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर पुल पर सभी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी, जिससे प्रेमनगर और आसपास के इलाकों में लंबा यातायात जाम लग गया तथा रोजाना आवाजाही करने वाले हजारों यात्रियों, विद्यार्थियों और मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ITV News के संवाददाताओं से बात करते हुए लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने पुष्टि की कि स्थिति को संभालने और कटाव को रोकने के लिए भारी बुलडोजर, कंक्रीट ब्लॉक और रेत की बोरियों के साथ आपातकालीन मरम्मत टीमों को तुरंत मौके पर तैनात कर दिया गया है। उद्घाटन के इतने कम समय के भीतर सड़क धंसने से स्थानीय निवासियों और नागरिक सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है, जिसके बाद जिला प्रशासन ने इस बात की तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं कि क्या निर्माण में घटिया सामग्री, गलत जल निकासी व्यवस्था या कमजोर मिट्टी भराव इसके मुख्य कारण थे। राज्य के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने बताया कि देहरादून जिले में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं, रिटेनिंग दीवारें गिर रही हैं और शहरी इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति बनी हुई है। पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि हिमालय के निचले इलाकों में हो रहे तेजी से और अव्यवस्थित निर्माण कार्य मानसूनी आपदाओं के प्रति बेहद संवेदनशील हैं, जिन्हें सुधारने के लिए सख्त जल निकासी मानक लागू किए जाने चाहिए। यातायात पुलिस ने आपातकालीन मरम्मत कार्य जारी रहने तक आम जनता को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी है। ITV News ने अपनी रिपोर्ट के समापन पर जोर देकर कहा कि स्थानीय नागरिक सरकार से ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त जवाबदेही तय करने तथा सार्वजनिक संपत्तियों के सुरक्षा ऑडिट की मांग कर रहे हैं।

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