देहरादून जिले में बढ़ते नशे के कारोबार और मादक पदार्थों की तस्करी पर पूर्ण विराम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रणनीति तैयार करते हुए व्यापक अभियान शुरू किया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति (NCORD) की बैठक में फैसला लिया गया कि नशा तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए जीआईएस (GIS) मैपिंग के जरिए संवेदनशील हॉटस्पॉट क्षेत्रों को चिह्नित कर लक्षित छापेमारी की जाएगी। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में नियमित पाठ्यक्रम के साथ एंटी-ड्रग्स, साइबर अपराध और वित्तीय अपराध से संबंधित विषय पढ़ाए जाएंगे। इसके साथ ही, जिले में संचालित नशा मुक्ति केंद्रों का भौतिक सत्यापन किया गया, जिसमें नियमों का उल्लंघन करने वाले 23 केंद्र बंद पाए गए और 15 अन्य केंद्रों के खिलाफ अनियमितताओं के चलते कड़ी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस प्रशासन और एसटीएफ (STF) को ई-ड्रग्स तथा केमिकल ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़ने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि हॉस्टलों, पीजी और कोचिंग सेंटरों के आसपास सीसीटीवी से निगरानी बढ़ाई जा रही है।
नशे के खिलाफ देहरादून प्रशासन का सख्त रुख, शिक्षण संस्थानों में शामिल होंगे एंटी-ड्रग्स विषय

