संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तब भारी तनाव देखने को मिला, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विभिन्न छात्र संगठनों के बैनर तले हजारों युवाओं ने संसद भवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और CJP संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में यह आंदोलन NEET-UG परीक्षा की कथित गड़बड़ियों और बढ़ती बेरोजगारी के खिलाफ सरकारी जवाबदेही की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह शांतिपूर्ण मार्च तब उग्र हो गया जब प्रदर्शनकारियों ने मध्य दिल्ली की ओर बढ़ने के लिए पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स तोड़ दिए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का प्रयोग किया, जिससे मुख्य सड़कों पर भगदड़ की स्थिति बन गई। इस झड़प में पुलिसकर्मियों सहित 100 से अधिक छात्र व प्रदर्शनकारी घायल हो गए, जिसके बाद दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जनपथ और आसपास के मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए। कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और केंद्र सरकार पर दमनकारी नीतियों का आरोप लगाया। वहीं, गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी तथा बैरिकेडिंग अनिवार्य थी। सोनम वांगचुक की अनशन के कारण बिगड़ती तबीयत और पुलिस कार्रवाई के मुद्दे ने संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा खड़ा कर दिया, जिसके चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
दिल्ली में NEET-UG परीक्षा में जवाबदेही की मांग को लेकर CJP के संसद मार्च के दौरान झड़प

