उत्तराखंड विशेष कार्य बल (STF) और ड्रग्स कंट्रोल विभाग की संयुक्त टीम ने एक बेहद संवेदनशील और बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए नकली दवाओं के एक अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो देहरादून को एक प्रमुख केंद्र के रूप में इस्तेमाल कर रहा था। खुफिया सूचनाओं के आधार पर की गई इस छापेमारी की कड़ी उत्तराखंड से जुड़ते हुए बिहार के गया जिले तक जा पहुँची, जहाँ से मुख्य सरगना सहित आठ शातिर आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। यह गैंग जीवन रक्षक दवाओं, विशेषकर एंटीबायोटिक्स, हृदय रोग और दर्द निवारक दवाओं की हूबहू नकली प्रतियां तैयार कर उन्हें वैध बैच नंबरों के साथ देश के विभिन्न राज्यों के ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों में सप्लाई कर रहा था। देहरादून के सेलाकुई औद्योगिक क्षेत्र और विकासनगर के कुछ गोदामों से इस गिरोह द्वारा भारी मात्रा में कच्चा माल, पैकेजिंग मशीनें, और नामी फार्मा कंपनियों के नकली रैपर बरामद किए गए हैं, जिनकी बाजार में कीमत करोड़ों रुपये आंकी गई है। पुलिस की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क पिछले दो सालों से बिना किसी वैध लाइसेंस के बड़े पैमाने पर सक्रिय था, और वित्तीय लेन-देन के लिए फर्जी बैंक खातों और शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर रहा था। एसटीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस गिरोह के तार देश के कई अन्य बड़े महानगरों और कुछ थोक दवा डीलरों से भी जुड़े हुए हैं, जो मुनाफे के लालच में इन नकली और जानलेवा दवाओं को सीधे मेडिकल स्टोरों तक पहुँचाते थे। इस बड़ी कार्रवाई के बाद उत्तराखंड के स्वास्थ्य विभाग ने देहरादून और उसके आसपास की सभी छोटी-बड़ी फार्मास्युटिकल निर्माण इकाइयों की औचक जांच और सख्त ऑडिट करने के आदेश जारी कर दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के मानव जीवन के साथ खिलवाड़ करने वाले अवैध और जानलेवा गोरखधंधे पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सके।
एसटीएफ (STF) की बड़ी कामयाबी: देहरादून से संचालित नकली दवाओं के देशव्यापी नेटवर्क का भंडाफोड़, बिहार से 8 आरोपी गिरफ्तार

