उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और उसके नजदीकी पर्यटन स्थल मसूरी में देर रात आए भीषण आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है, जिससे पूरे क्षेत्र में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। मौसम विभाग के अचानक आए इस मिजाज के कारण 80 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने देहरादून के चक्रता रोड, राजपुर रोड और देहरादून-मसूरी हाईवे पर सैकड़ों विशालकाय और पुराने पेड़ों को जड़ से उखाड़ फेंका। इन उखड़े हुए पेड़ों के बिजली के मुख्य तारों और खंभों पर गिरने के कारण मालसी, जाखन और क्लेमेंट टाउन सहित देहरादून के कई प्रमुख रिहायशी इलाकों में आधी रात से ही बिजली गुल हो गई, जिसके चलते सुबह पानी की मोटर न चल पाने से लोगों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ा। मसूरी में इस तूफान का असर और भी भयावह देखा गया, जहाँ कैमल्स बैक रोड पर स्थित दुर्गा मंदिर क्षेत्र में विशालकाय पेड़ों के गिरने से कम से कम पांच आवासीय मकानों की छतें पूरी तरह ध्वस्त हो गईं। इसके अलावा, मॉल रोड पर स्थित बीएसएनएल और एलआईसी जैसी महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों की छतें उड़ गईं, और प्रसिद्ध गन हिल की ओर जाने वाले रोपवे का शेड भी तूफान की तीव्रता के कारण हवा में बिखर गया। शहर के निचले इलाकों और मुख्य चौराहों पर भारी जलभराव की स्थिति देखी गई, जिससे कई स्थानीय नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया, और सड़कों पर खड़े वाहनों को भारी नुकसान पहुँचा। जिला प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) की टीमों ने सुबह होते ही युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया, जिसके तहत मुख्य मार्गों से गिरे हुए पेड़ों को काटकर हटाया जा रहा है ताकि यातायात को सुचारू किया जा सके। इस प्राकृतिक आपदा ने मानसून से ठीक पहले नगर निगम और जल विद्युत विभाग की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी है, जिससे स्थानीय निवासियों में आने वाले मानसून सीजन की सुरक्षा को लेकर भारी चिंता और रोष व्याप्त हो गया है।
देहरादून और मसूरी में आंधी-तूफान का भीषण कहर: सैकड़ों पेड़ उखड़े, बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप और कई मकान क्षतिग्रस्त

