प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी राजकीय यात्रा के दौरान इंडोनेशियाई संसद को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया और एक अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था का आह्वान किया। उन्होंने समान विकास, मजबूत अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और एक स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र के भारत के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। इंडोनेशिया ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के ‘जीरो-टॉलरेंस’ (शून्य सहिष्णुता) के रुख का समर्थन किया, जबकि दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग का विस्तार किया। इस यात्रा के परिणामस्वरूप कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते भी हुए, जिनसे दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के मजबूत होने की उम्मीद है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बढ़ती साझेदारी भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) के तहत दक्षिण-पूर्व एशिया में उसके प्रभाव को बढ़ाएगी। चर्चाओं में कनेक्टिविटी (पारस्परिक जुड़ाव) में सुधार, निवेश के अवसरों, डिजिटल नवाचार (डिजिटल इनोवेशन) और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत की विकास यात्रा 1.4 अरब नागरिकों की आकांक्षाओं को दर्शाती है और उन्होंने शांतिपूर्ण वैश्विक प्रगति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस यात्रा को एक महत्वपूर्ण राजनयिक उपलब्धि माना जा रहा है और इससे कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग गहरा होने की उम्मीद है।

