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चारधाम यात्रा मार्ग पर भारी वाहनों के कारण यातायात संकट, सुरक्षा ऑडिट और दुर्घटनाओं से बढ़ी प्रशासन की चिंता

उत्तराखंड में चल रही ऐतिहासिक चारधाम यात्रा इस समय अपने चरम पर है, लेकिन इसके साथ ही बदरीनाथ और केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते यातायात और लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने राज्य प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है। गढ़वाल आयुक्त ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई है जिसमें उन्होंने यात्रा मार्ग पर स्थित सभी स्कूलों, कॉलेजों और विशेष रूप से अस्पतालों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके। यातायात की बात करें तो, वीकेंड के दौरान नैनीताल और मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों के साथ-साथ गंगोत्री और यमुनोत्री के मुख्य मार्गों पर कई किलोमीटर लंबा जाम देखा गया, जिससे स्थानीय निवासियों का सामान्य जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। स्थानीय उप-जिलाधिकारियों (SDM) के अनुसार, प्रतिबंधित समय सीमा समाप्त होने के बाद भी भारी मालवाहक वाहनों का अवैध रूप से नगर क्षेत्रों में प्रवेश करना इस भीषण जाम का सबसे बड़ा कारण बन रहा है। सुरक्षा के मोर्चे पर भी चुनौतियां कम नहीं हैं; हाल ही में तोता घाटी के पास 39 यात्रियों से भरी एक बस के पलट जाने और बदरीनाथ हाईवे पर मेरठ के तीर्थयात्रियों के एक टेंपो-ट्रैवलर के दुर्घटनाग्रस्त होने से कुल 10 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इस बीच, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा रिकॉर्ड तोड़ते हुए 10 लाख के पार जा चुका है, जिसके चलते जिला प्रशासन अब प्लास्टिक कचरे और पॉलिथीन के प्रबंधन के लिए पूरे यात्रा रूट पर विशेष स्वच्छता अभियान चला रहा है।

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