देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए एक बड़ा और कड़ा नीतिगत निर्देश जारी किया है, जिसके तहत अब राज्य की सड़कों और सार्वजनिक मार्गों पर खुले में नमाज पढ़ने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। मुख्यमंत्री ने देहरादून में आयोजित एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता या नमाज पढ़ने पर कोई पाबंदी नहीं लगा रही है, लेकिन धार्मिक प्रार्थनाएं केवल उन्हीं स्थानों पर अदा की जानी चाहिए जो प्रशासन द्वारा पहले से चिन्हित या कानूनी रूप से स्वीकृत हैं। इस समय पूरे उत्तराखंड में विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अपने चरम पर है और देश-विदेश से रोजाना रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालु केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पहुंच रहे हैं, जिससे देहरादून और ऋषिकेश जैसे प्रवेश द्वारों पर वाहनों का दबाव अत्यधिक बढ़ गया है। ऐसी संवेदनशील स्थिति में सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार के धार्मिक जमावड़े से यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो सकती है, जो आपातकालीन सेवाओं और तीर्थयात्रियों के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर सकता है। मुख्यमंत्री धामी ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और यदि कोई भी व्यक्ति या समूह नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने राज्य की सरकारी और वन भूमि से हर प्रकार के अवैध धार्मिक और गैर-धार्मिक अतिक्रमण को तुरंत हटाने के लिए भी एक व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, जिसके लिए जिला प्रशासनों को विशेष शक्तियां सौंपी गई हैं। सरकार का मानना है कि राज्य की देवभूमि जैसी पवित्र छवि को बनाए रखने और पर्यटन सीजन के दौरान आम जनता को होने वाली असुविधाओं को कम करने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था, जिससे सामाजिक सौहार्द और कानून का शासन पूरी दृढ़ता के साथ बना रहे।
कड़ा रुख: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का निर्देश, सड़कों पर नमाज पढ़ने पर रोक, केवल चिन्हित स्थानों पर ही दी जाएगी अनुमति

