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चारधाम यात्रा और कानून व्यवस्था: देहरादून प्रशासन ने नियमों के उल्लंघन पर 103 होमस्टे के पंजीकरण किए रद्द

देहरादून: उत्तराखंड में चल रही ऐतिहासिक चारधाम यात्रा के बीच राजधानी देहरादून के जिला प्रशासन ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले 103 होमस्टे के पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए हैं। हाल ही में किए गए इस बड़े बदलाव के तहत देहरादून के तत्कालीन जिलाधिकारी सविन बंसल के स्थानांतरण और नए जिलाधिकारी आशीष चौहान की नियुक्ति से ठीक पहले इन कड़े आदेशों को अंतिम रूप दिया गया। प्रशासन द्वारा अप्रैल महीने से चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन-अप’ के तहत कुल सात और होमस्टे पर गाज गिरी, जिसके बाद यह कुल आंकड़ा बढ़कर 103 तक पहुंच गया है। अधिकारियों के मुताबिक, इन होमस्टे संचालकों पर उत्तराखंड होमस्टे नियमावली के प्रावधानों का पालन न करने और पर्यटन विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाने के गंभीर आरोप हैं। जिला प्रशासन को पिछले कुछ महीनों से शहर में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों, नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और देर रात तक बिना अनुमति के बार व डीजे संचालित करने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जो स्थानीय कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी थीं। कई होमस्टे और होटलों में संदिग्ध पृष्ठभूमि वाले पर्यटकों और अनियंत्रित व्यक्तियों को बिना किसी उचित दस्तावेजी सत्यापन या पुलिस वेरिफिकेशन के ठहराया जा रहा था, जिससे शहर की सुरक्षा व्यवस्था चरमरा रही थी। इसके अलावा, कई होमस्टे को अनधिकृत लीज समझौतों के तहत चलाया जा रहा था, जिसे पुलिस विभाग ने कानून बनाए रखने में एक बड़ी चुनौती माना है। इस औचक कार्रवाई को अंजाम देने के लिए प्रशासन ने पूरे देहरादून जिले में पांच विशेष मजिस्ट्रेटी टीमों को तैनात किया था, जिन्होंने अलग-अलग चरणों में जांच कर इन अवैध गतिविधियों का भंडाफोड़ किया। पूर्व जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि होमस्टे योजना का मूल उद्देश्य उत्तराखंड की समृद्ध स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देना और स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका को मजबूत करना था, न कि इसे अवैध और अनैतिक गतिविधियों का अड्डा बनाना। अब इन सभी चिन्हित संपत्तियों को पर्यटन विभाग की आधिकारिक सूची से हटाने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है, जिससे राज्य के पर्यटन क्षेत्र में पारदर्शिता लाई जा सके।

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