अघारकर रिसर्च इंस्टीट्यूट (ARI), पुणे के वैज्ञानिकों ने अंगूरों में ‘बीजहीनता’ (Seedlessness) के लिए जिम्मेदार प्रमुख आनुवंशिक और विकासात्मक तंत्रों की पहचान करने में सफलता प्राप्त की है। आज जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, शोधकर्ताओं ने उन जीन समूहों को डिकोड किया है जो फलों के विकास के दौरान बीजों को बनने से रोकते हैं, जबकि फल का आकार और मिठास बरकरार रहती है। उपभोक्ताओं के बीच बीजहीन अंगूरों की भारी मांग को देखते हुए यह खोज वैश्विक बागवानी और निर्यात उद्योग के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इस शोध की मदद से कृषि वैज्ञानिक अब कम पानी और प्रतिकूल जलवायु में भी उच्च गुणवत्ता वाले बीजहीन अंगूरों की नई किस्में विकसित कर सकेंगे। भारत के कृषि निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में इसे एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि माना जा रहा है।
पुणे के वैज्ञानिकों ने अंगूरों में बीजहीन होने के पीछे के जेनेटिक रहस्य को सुलझाया

